प्रधानमंत्री नमामि गंगे योजना 2022 | Pradhan Mantri Namami Gange Yojana 2022 | PM Namami Gange Yojana 2022 , Benefits, Requirement, Contribution

सरकार द्वारा गंगा दी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए ‘नमामि गंगे’ नामक एक एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन का शुभारंभ किया गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा नदी की सफाई के लिए बजट को चार गुना करते हुए पर 2021-2022 तक नदी की सफाई पर 20,000 करोड़ रुपए खर्च करने की केंद्र की प्रस्तावित कार्य योजना को मंजूरी दे दी गई है और इसे 100% केंद्रीय हिस्सेदारी के साथ एक केंद्रीय योजना का रूप दिया जाएगा।

शुरूआती स्तर की गतिविधियों के अंतर्गत नदी की उपरी सतह की सफ़ाई से लेकर बहते हुए ठोस कचरे की समस्या को हल करने, ग्रामीण क्षेत्रों की सफ़ाई से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की नालियों से आते मैले पदार्थ (ठोस एवं तरल) और शौचालयों के निर्माण, शवदाह गृह का नवीकरण, आधुनिकीकरण और निर्माण ताकि अधजले या आंशिक रूप से जले हुए शव को नदी में बहाने से रोका जा जाएगा लोगों और नदियों के बीच संबंध को बेहतर करने के लिए घाटों के निर्माण, मरम्मत और आधुनिकीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा।

नमामि गंगे प्रोजेक्ट की 231 योजनाओं में गंगोत्री से शुरू होकर हरिद्वार, कानपुर, इलाहाबद , बनारस, गाजीपुर , बलिया , बिहार में 4 और बंगाल में 6 जगहों पर पुराने घाटों का जीर्णोद्धार, नए घाट, चेंजिंग रूम, शौचालय, बैठने की जगह, सीवेज ट्रीटमेंट प्लान्ट, आक्सीडेशन प्लान्ट बायोरेमेडेशन प्रक्रिया से पानी के शोधन का काम इस योजना के अंतर्गत किया जाएगा।  इसमें गांव के नालों को भी शामिल किया जाएगा। साथ ही तालाबों का गंगा से जुड़ाव पर असर भी देखा जाएगा।

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 प्रधानमंत्री नमामि गंगे योजना 2022 का उद्देश्य | Pradhan Mantri Namami Gange Yojana 2022 : Objectives

  • नमामि गंगा परियोजना का मुख्य लक्ष्य ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से गंगा तट पर बसे गाँवों के सम्‍पूर्ण विकास के लिये एकीकृत दृष्टिकोण को अपनाना होगा।
  • नमामि गंगा योजना के अंतर्गत ठोस और द्रव कचरा प्रबंधन, तालाबों और अन्‍य जलाशयों के पुनरूद्धार, जल संरक्षण परियोजनाओं, जैविक खेती, बागवानी तथा औषधीय पौधों को प्रोत्‍साहन देने जैसे घटकों को शामिल किया जाएगा।
  • गंगा नदी के प्रदूषण निवारण और नदी को पुनर्जीवित करने का उद्देश्य इसके सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक महत्त्व के लिये इसका दोहन करने के कारण अत्यंत जटिल कार्य होगा। इस तरह के जटिल कार्यक्रम को सफलतापूर्वक कार्यान्वित करने के लिये समुदाय की भागीदारी आवश्यक होगी।
  • गंगा के पुनर्जीवन के लिये भारी मात्रा में निवेश की आवश्यकता होगी। सरकार द्वारा पहले ही बजट को चार गुना करने के बाद भी आवश्यकताओं के हिसाब से यह पर्याप्त नहीं होगा।
  • सरकार द्वारा नालियों से संबंधित आधारभूत संरचना का निर्माण किया जाएगा, लेकिन नागरिक कचरे और पानी के उपयोग को कम कर सकते हैं। उपयोग किये गए पानी, जैविक कचरे एवं प्लास्टिक के पुनर्चक्रण और इसके पुनः उपयोग से इस कार्यक्रम को बहुत लाभ हो सकेगा।

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 प्रधानमंत्री नमामि गंगे योजना 2022 के लाभ | Pradhan Mantri Namami Gange Yojana 2022 : Benefits

  • इस योजना के अंतर्गत 32 परियोजनाओं में से 871.74 करोड़ रुपए की कुल लागत वाली 20 परियोजनाएँ सीवर शोधन तथा उत्तराखंड के विभिन्‍न भागों में आधारभूत संरचना के निर्माण से संबंधित होगा।
  • इस योजना के तहत छह परियोजनाएँ हरिद्वार में लागू की जाएंगी। जिसके अंतर्गत जगजीतपुर और सराय में दो एसटीपी का निर्माण किया जाएगा। हरिद्वार की परियोजनाओं की कुल लागत 414.20 करोड़ रुपए होगी।
  • नमामि गंगे योजना के अंतर्गत सभी परियोजनाओं के पूरे होने के बाद हरिद्वार और ऋषिकेश समेत उत्तराखंड के सभी प्रमुख शहरों का पानी बिना शोधित हुए गंगा में नहीं जाएगा।
  • इसके अलावा उत्तरकाशी, मुनि की रेती, कीर्ति नगर, श्रीनगर, रुद्र प्रयाग, बद्रीनाथ, जोशीमठ, चमोली, नंद प्रयाग और कर्ण प्रयाग में सीवेज शोधन परियोजनाओं की आधारशिलाएँ रखी जाएंगी।
  • टिहरी गढ़वाल, रुद्र प्रयाग और चमोली में घाट विकास कार्यों के लिये आधारशिलाएं रखी जाएंगी।

 प्रधानमंत्री नमामि गंगे योजना 2022 की विशेषताएं | Pradhan Mantri Namami Gange Yojana 2022 : Features

  • 45 अरब रुपए का यह ऋण विश्व बैंक द्वारा पाँच वर्ष की अवधि के लिये मंज़ूर किया जाएगा।
  • नमामि गंगे/नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन परियोजना के पहले चरण जो कि दिसंबर 2021 तक है, के लिये विश्व बैंक से 4,535 करोड़ रूपए ($ 600 मिलियन) पहले ही प्राप्त किए चुके हैं।
  • अब तक नमामि गंगे योजना के अंतर्गत विश्व बैंक द्वारा 25,000 करोड़ रुपए की 313 परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्लैगशिप योजना ‘नमामि गंगे’ को मई 2015 में मंजूरी दी गई थी।
  • इस योजना के अंतर्गत गंगा नदी को समग्र तौर पर संरक्षित और स्वच्छ करने के कदम उठाए जाएंगे।
  • गंगा को स्वच्छ करने के लिये पिछले 30 सालों में सरकार की ओर से खर्च की गई राशि से यह चार गुना अधिक होगी।

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प्रधानमंत्री नमामि गंगे योजना के अंतर्गत योगदान | Pradhan Mantri Namami Gange Yojana 2022 : Contribution

गंगा नदी की सफ़ाई इसके सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व और विभिन्न उपयोगों के लिए इसका दोहन करने के कारण अत्यंत जटिल होगा। विश्व में कभी भी इस तरह का जटिल कार्यक्रम कार्यान्वित नहीं किया गया है और इसके लिए देश के सभी क्षेत्रों और हरेक नागरिक की भागीदारी आवश्यक होगी। विभिन्न तरीके हैं जिसके माध्यम से हम सभी गंगा नदी की सफ़ाई में अपना योगदान दे सकेंगे।

  • धनराशि का योगदान:- विशाल जनसंख्या और इतनी बड़ी एवं लंबी नदी गंगा की गुणवत्ता को बहाल करने के लिए भारी निवेश की आवश्यकता होगी। सरकार द्वारा पहले ही बजट को चार गुना कर दिया गया है। लेकिन अभी भी आवश्यकताओं के हिसाब से यह पर्याप्त नहीं होगा। स्वच्छ गंगा निधि बनाई गई है जिसमें सभी लोग गंगा नदी को साफ़ करने के लिए धनराशि का योगदान कर सकेंगे।
  • रिड्युस (कमी), रियूज (पुनः उपयोग) और रिकवरी (पूर्ववत स्थिति):- अधिकांश लोगों को यह पता नहीं होगा कि हमारे द्वारा इस्तेमाल किया गया पानी और हमारे घरों की गंदगी अंततः नदियों में ही जाती है अगर उसका सही से निपटारा न किया जाए। सरकार द्वारा पहले से ही नालियों से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन नागरिक कचरे और पानी के उपयोग को कम कर सकते हैं। उपयोग किए गए पानी, जैविक कचरे एवं प्लास्टिक की रिकवरी और इसके पुनः उपयोग से इस कार्यक्रम को काफ़ी लाभ प्राप्त हो सकेगा।

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प्रधानमंत्री नमामि गंगे योजना को बेहतर तरीके से लागू करने के लिये त्रिस्तरीय निगरानी कमेटी | Pradhan Mantri Namami Gange Yojana 2022 : 

  • कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कार्यबल का गठन किया गया है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर एन.एम.सी.जी. मदद की जाएगी।
  • राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है, जिसे एस.पी.एम.जी.ए. सहायता की जाएगी।
  • ज़िलाधिकारी की अध्यक्षता में ज़िला स्तर पर कमेटियाँ बनाई जाएगी।

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बेहतर और टिकाऊ परिणाम हासिल करने के लिये इस योजना में अहम् बदलाव करते हुए गंगा नदी के किनारे बसे लोगों को ‘स्वच्छ गंगा मिशन’ में शामिल किया जाएगा। गंगा स्वच्छता मिशन में राज्यों और ज़मीनी स्तर के संस्थानों, जैसे- शहरी स्थानीय निकाय और पंचायती राज संस्थानों को शामिल किया जाएगा। इस योजना को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा लागू किया जाएगा। हम सभी हमारी सभ्यता, हमारी संस्कृति और विरासत के प्रतीक हमारी राष्ट्रीय नदी गंगा को सुरक्षित करने के लिए एक साथ आगे आना होगा।

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